नीतीश के अलावा ये हैं बिहार में मुख्यमंत्री पद के 5 दावेदार

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बिहार में चुनावी घमसान जोरों पर है। तमाम पार्टियां चुनाव प्रचार में जुटी है और वोटरों को रिझाने की कवायद चरम पर है। सभी गठबंधन और पार्टियों का दावा है कि प्रदेश में उनकी ही सरकार बनेगी।

ऐसे में तमाम पार्टियां अपने-अपने मुख्यमंत्री पद के दावेदारों का भी ऐलान कर रखा है। बिहार में इसबार एक-दो नहीं मुख्यमंत्री पद के 6 दावेदार हैं। हालांकि ये 10 अक्टूबर को नतीजे आने के बाद ही पता चल पाएगा की बिहार की सीएम पद की कुर्सी पर कौन बैठगा और जनता ने किसके अपना मुख्यमंत्री माना है।

जेडीयू, बीजेपी, हम और वीआईपी के गठबंधन एनडीए ने फिर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया है। वहीं आरजेडी, कांग्रेस और तीन वामदलों के महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को अपना सीएम चेहरा माना है।

वहीं छह दलों को मिलाकर बने ग्रांड डेमोक्रेटिक सेकुलर एलायंस ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा तो प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन ने पप्पू यादव को अपना मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया है।

उधर, चिराग पासवान ने खुद को सीएम उम्मीदवार तो घोषित नहीं किया है, लेकिन उनकी पार्टी एलजेपी ने उन्हें सीएम पद का दावेदार बताया है। वहीं चुनाव से कुछ दिन पहले बनी प्लुरल्स पार्टी ने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी ने मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर रखा है।

नीतीश कुमार फिलहाल राज्य के मुख्यमंत्री है। इस बार भी अगर एनडीए चुनाव जीतने में कामयाब होती है तो नीतीश कुमार चौथी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद पर 5वीं काबिज होंगे। नीतीश कुमार को संसदीय जीवन का भी लंबा अनुभव है। वो 1985 में पहली बार विधायक बने जबकि 1989 में सांसद चुने गए।

इसके बाद 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में लगातार 6 बार लोकसभा के लिए चुने गए। नीतीश कुमार केंद्र में अबतक कृषि से लेकर रेलवे तक कई अहम मंत्रालय संभाल चुके हैं।

नीतीश कुमार 2000 में पहलीबार मुख्यमंत्री बने, लेकिन बतौर मुख्यमंत्री उनका पहला कार्यकाल महज 7 दिनों का रहा। इसके बाद वो 2005, 2010 और 2015 में मुख्यमंत्री पद पर काबिज हुए। कभी ऐसा वक्त था जब नीतीश कुमार को लोग सुशासन बाबू के नाम से भी पुकारते थे।

लालू यादव के बीमार पड़ने के बाद तेजस्वी यादव उनकी विरासत को संभाल रहे हैं। तेजस्वी यादव का संसदीय अनुभव थोड़ा कम है लेकिन आरजेडी, कांग्रेस और तीन वामदलों के महागठबंधन ने उन्हें अपना सीएम चेहरा घोषित कर रखा है। पिछले विधानसभा चुनाव 2015 में तेजस्वी यादव पहली बार चुनावी मैदान में उतरे और विधायक बने।

नीतीश कुमार की अगुवाई में महागठबंधन की बनी सराकर में उन्हें उपमुख्यमंत्री का ओहदा समेत कई अहम मंत्रालय मिला, लेकिन नीतीश कुमार के महागठबंधन से अलग होने से वह सरकार से बाहर हो गये।

तेजस्वी यादव के साथ जहां लालू यादव की राजनीतिक विरासत वहीं वो खुद पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए आवाज उठाते रहे है। फिलहाल आरजेडी को माई समीकरण से निकालकर ए टू जेड की पार्टी बनाने की कोशिश में जुटे हैं।