क्या चुनाव से पहले ही शिवराज ने टेक दिए घुटने

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भोपाल ब्यूरो। मध्य प्रदेश में होने जा रहे 28 विधानसभा सीटों के उपचुनाव को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर दावा किया है कि कमलनाथ एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। पार्टी ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडलर से ट्वीट कर दावा किया कि उपचुनाव को लेकर सर्वे में चौंकाने वाले नतीजे सामने आये हैं।

हालांकि यह पहला अवसर नहीं है, मध्य प्रदेश कांग्रेस पहले ही चुनावी सर्वे को लेकर दावे करती रही है। 28 सीटों के उपचुनावों को लेकर पार्टी 21-22 सीटें जीतने के दावे करती रही है।

हालांकि यह असंभव नहीं है। जिस तरह पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और कांग्रेस उम्मीदवारों की सभाओं में भीड़ जुट रही है वह कांग्रेस के लिए सुखद संदेश देने वाली कहा जा सकता है लेकिन अहम सवाल यह है कि क्या यह भीड़ वोटों में परिवर्तित हो पाएगी।

उपचुनाव में कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा है। वह पहले ही विपक्ष में है लेकिन यदि वह भीड़ को वोटों में बदलने में सफल रहती है तो राज्य की शिवराज सरकार के लिए खतरा पैदा होना तय है। हालांकि चुनाव विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस ने इस बार दो काम पिछले चुनावो पिछले चुनावो से अलग किये है।

पहला काम समय से उम्मीदवार तय करना और दूसरा काम एजेंसी से मिली सर्वे रिपोर्ट के आधार पर उम्मीदवारों का चयन करना। यही कारण है कि इस बार कहीं भी बीजेपी के लिए मुकाबला एकतरफा और आसान नहीं रह गया है और उसे हर सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार से बड़ी चुनौती मिल रही है।

उपचुनाव में बीजेपी के चेहरे पर उभरी चिंता की लकीरें ये बताने के लिए काफी हैं कि इस बार उसकी राह आसान नहीं है। उपचुनाव से पहले कई अहम मुद्दे अपने हाथ से गंवा चुकी भारतीय जनता पार्टी को आंतरिक कलह से भी जूझना पड़ रहा है।

ग्वालियर इलाके में सिंधिया समर्थको और बीजेपी कार्यकर्ताओं में कई जगह 36 का आंकड़ा पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला है। वहीँ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आये नेताओं का विरोध और उन पर लगी गद्दारी की मुहर उनके लिए चुनाव में रोड़ा बन सकती है।

माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी को ग्वालियर चंबल के इलाके की 16 सीटों से अधिक उम्मीद नहीं है। इसलिए वह सिर्फ उतनी सीटें जीतना चाहती है जिससे राज्य में उसकी सरकार बरकरार रह सके। भारतीय जनता पार्टी की चुनाव में कैसी स्थति थी है,

इसका अंदाजा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के आशय से लगाए जा सकते हैं जिसमे उन्होंने एक चुनावी सभा के दौरान न सिर्फ घुटनो के बल बैठकर सिर झुकाकर जनता को नमन किया बल्कि वे अपने भाषण के दौरान भावुक भी हो गए। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि

“आज मेरे दिल में आ रहा है कि मैं यहां बैठकर सिर झुकाकर मंदसौर और नीमच की जनता को प्रणाम कर कार्यकर्ताओं को धन्यवाद दूं । चुनाव के समय लोग कहते थे कि मंदसौर और नीमच में सूपड़ा साफ हो जाएगा, तब आपने ऐसा साथ दिया कि मैं कभी नहीं भूलूंगा।”

फिलहाल ग्राउंड ज़ीरो को देखें तो 20 से अधिक सीटों पर हवा बीजेपी के खिलाफ है। इनमे 16 सीटें ग्वालियर चंबल इलाके की भी हैं। चुनाव विश्लेषकों की माने तो जैसे जैसे चुनाव की तारीख करीब आएगी वैसे वैसे चुनावी माहौल तेजी से बदलेगा। चुनाव विश्लेषकों के मुताबिक उपचुनाव में बीजेपी के तरकश में तीरो की कमी है,

वह कांग्रेस पर सीमित हमले ही बोल सकती है। वहीँ कांग्रेस के पास तरकश में तीरो की संख्या कहीं अधिक है। बीजेपी को केंद्र और राज्य दोनों में सरकार होने का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। विश्लेषकों के मुताबिक बीजेपी की दूसरी बड़ी मुश्किल मध्य प्रदेश से सटे दो राज्यों राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार होना है।

सीमा से सटे इलाको में पड़ौसी राज्य से चलने वाली राजनीतिक हवा भी प्रभाव डालती है। फिलहाल देखना है कि जैसे जैसे चुनाव की तारीख बदलती है राज्य में चलने वाली चुनावी हवा किस की तरफ रुख करती है। जहां तक कांग्रेस और बीजेपी के लिए चिंता का सवाल है तो बीजेपी की चिंताएं कांग्रेस से कहीं अधिक हैं।

यदि कांग्रेस 20 से अधिक सीटें जीत पाती है तो शिवराज सरकार के लिए खतरे की घंटी बजना तय है और कांग्रेस विधायकों से इस्तीफा दिलाकर बीजेपी में लाने की उसकी सारी मेहनत पर पानी फिर सकता है।